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टाट-पट्टी पर पढ़ाई, जर्जर छत के नीचे फोटो बच्छी का खेल!

 

शिक्षक की अनुपस्थिति में फोटो बच्ची खेलते नादान बच्चे


शासकीय प्राथमिक शाला छिन्दौली की तस्वीरों ने शिक्षा व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल

छिन्दौली, पिथौरा | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।

सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के दावों के बीच शासकीय प्राथमिक शाला छिन्दौली, विकासखंड पिथौरा, जिला महासमुंद से सामने आई तस्वीरें व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

एक तस्वीर में बच्चे फर्श पर टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ते नजर आ रहे हैं, दूसरी तस्वीर में स्कूल परिसर में कुछ बच्चे फोटो बच्छी के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं, जबकि स्कूल की जर्जर छत की तस्वीर भी सामने आई है। इन तस्वीरों ने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं, भवन की स्थिति, निगरानी और शैक्षणिक अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

      टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे


टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे

सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए बेहतर बैठने की व्यवस्था उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन छिन्दौली स्कूल की तस्वीर में बच्चे फर्श पर टाट-पट्टी पर बैठे दिखाई दे रहे हैं।

सवाल यह है कि क्या स्कूल में पर्याप्त डेस्क-बेंच अथवा बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है? यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?

                        जर्जर छत 


जर्जर छत के नीचे पढ़ाई, सुरक्षा पर सवाल

विद्यालय भवन की जर्जर छत की तस्वीर भी सामने आई है। यदि छत की स्थिति वास्तव में खराब है और उसी भवन में बच्चे पढ़ रहे हैं, तो यह बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय है।

सवाल यह है कि विद्यालय भवन की स्थिति का विभागीय स्तर पर निरीक्षण कब किया गया? क्या जर्जर हिस्से की मरम्मत के लिए कोई प्रस्ताव या कार्रवाई की गई है? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या बच्चों के लिए भवन पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया गया है?



स्कूल में फोटो बच्छी खेलते नजर आए बच्चे, निगरानी पर सवाल

दूसरी तस्वीर और भी गंभीर सवाल खड़े करती है। स्कूल परिसर में कुछ बच्चे फोटो बच्छी के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं।

सिर्फ तस्वीर के आधार पर इसे किसी अवैध गतिविधि का प्रमाण कहना उचित नहीं होगा, लेकिन यदि यह गतिविधि स्कूल समय में हुई है, तो विद्यालय में बच्चों की निगरानी और अनुशासन व्यवस्था की जांच की मांग जरूर करती है।

आखिर उस समय बच्चों की निगरानी कौन कर रहा था? क्या शिक्षक कक्षा में मौजूद थे? क्या प्रधान पाठक अथवा संबंधित स्टाफ को इसकी जानकारी थी?

BEO और शिक्षा विभाग की निगरानी पर भी सवाल

स्कूलों की नियमित निगरानी और निरीक्षण की व्यवस्था होने के बावजूद यदि किसी विद्यालय में ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि निरीक्षण के दौरान वास्तविक स्थिति कितनी गंभीरता से जांची जाती है?

क्या निरीक्षण केवल उपस्थिति रजिस्टर, दस्तावेज और रिपोर्ट तक सीमित है या बच्चों की वास्तविक पढ़ाई, बैठने की व्यवस्था, भवन की सुरक्षा और विद्यालय परिसर में अनुशासन को भी देखा जाता है?

शिक्षा विभाग से जवाब अपेक्षित

शासकीय प्राथमिक शाला छिन्दौली की इन तस्वीरों के आधार पर शिक्षा विभाग को स्पष्ट करना चाहिए—

  • विद्यालय में बच्चों के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच की व्यवस्था है या नहीं?
  • विद्यालय भवन की छत की वर्तमान स्थिति क्या है?
  • जर्जर छत की मरम्मत के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई?
  • क्या भवन का हाल में तकनीकी/विभागीय निरीक्षण हुआ है?
  • स्कूल समय में बच्चों की निगरानी की जिम्मेदारी किस शिक्षक/कर्मचारी की थी?
  • तस्वीर में दिखाई दे रही फोटो बच्छी खेलने की गतिविधि किस समय की है और उस समय शिक्षक कहाँ थे?
  • विद्यालय का अंतिम औचक निरीक्षण कब हुआ था?
  • निरीक्षण में बैठने की व्यवस्था, भवन की स्थिति और बच्चों की निगरानी को लेकर क्या पाया गया?
  • यदि कोई कमी पाई गई है तो उसे दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की गई?

अब जांच की जरूरत

छिन्दौली स्कूल की तस्वीरें महज एक विद्यालय की स्थिति हैं या व्यवस्था की बड़ी समस्या का संकेत—यह मौके पर जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन टाट-पट्टी पर बैठे बच्चे, जर्जर छत और स्कूल परिसर में फोटो बच्छी की तस्वीरों ने विद्यालय प्रबंधन से लेकर ब्लॉक शिक्षा विभाग तक जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इन तस्वीरों को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज करता है या मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है।

सत्यवाहक न्यूज:-

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