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| 261 विद्यार्थियों वाले इस विद्यालय में शौचालय की बदहाल स्थिति |
पिथौरा। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बुंदेली, जिसे शहीद कमलेश्वर सोनवानी के नाम पर समर्पित किया गया है, वहां विद्यालय की बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। 261 विद्यार्थियों वाले इस विद्यालय में शौचालय की बदहाल स्थिति और पेयजल की समस्या स्कूल की स्वच्छता व्यवस्था के साथ-साथ विभागीय निगरानी पर भी सवाल खड़े करती है।
विद्यालय में कुल 261 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 154 छात्राएं और 107 छात्र शामिल हैं। ऐसे विद्यालय में छात्राओं के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और उपयोग योग्य शौचालय की व्यवस्था बेहद जरूरी है। लेकिन मौके की तस्वीरें विद्यालय की जमीनी स्थिति पर सवाल उठाती हैं।
154 छात्राओं के बीच गंदे शौचालय, पानी की समस्या
विद्यालय में 154 छात्राओं और 2 महिला शिक्षकों की मौजूदगी के बावजूद शौचालय की साफ-सफाई और रखरखाव की स्थिति चिंता का विषय है। शौचालयों की नियमित सफाई, पानी की उपलब्धता और उन्हें उपयोग योग्य बनाए रखना विद्यालय की बुनियादी व्यवस्थाओं का हिस्सा है।
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| गंदे शौचलय |
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| गंदे शौचालय |
सवाल यह है कि क्या विद्यालय में स्वच्छता व्यवस्था की नियमित जांच होती है? यदि होती है तो मौके पर दिखाई दे रही यह स्थिति जिम्मेदारों की निगरानी से कैसे बची?
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ दिन पहले BEO कार्यालय की स्वच्छता और शौचालय व्यवस्था को लेकर भी सवाल सामने आए थे। अब BEO कार्यालय के बाद शिक्षा विभाग से जुड़े विद्यालय में भी शौचालय की बदहाल तस्वीर सामने आने से विभागीय स्वच्छता व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल और गंभीर हो जाते हैं।
9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई, केवल 7 शिक्षक
स्वच्छता के बाद दूसरा बड़ा सवाल विद्यालय की शिक्षक व्यवस्था को लेकर है। विद्यालय में कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं की पढ़ाई होती है, लेकिन कुल 7 शिक्षक ही पदस्थ हैं। इनमें 2 अतिथि शिक्षक शामिल हैं।
261 विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध यह शिक्षक व्यवस्था स्वीकृत पदों और विषयवार आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त है या नहीं, यह शिक्षा विभाग को स्पष्ट करना चाहिए। खासकर कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड कक्षाएं होने के कारण विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्या सभी जरूरी विषयों के शिक्षक उपलब्ध हैं? क्या किसी शिक्षक के पास एक से अधिक कक्षाओं या विषयों की जिम्मेदारी है? क्या कोई स्वीकृत पद रिक्त है? इन सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड से सामने आना चाहिए।
इस व्यवस्था को लेकर प्राचार्य से भी सवाल है कि क्या शिक्षक की कमी अथवा विषयवार शिक्षकों की आवश्यकता को लेकर उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया गया है? यदि पत्राचार किया गया है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है?
BEO निरीक्षण पर उठे सवाल
विद्यालय की स्वच्छता, पेयजल और शिक्षक व्यवस्था जैसी मूलभूत चीजों की निगरानी शिक्षा विभाग के स्थानीय तंत्र की जिम्मेदारी है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि BEO या संबंधित अधिकारी ने विद्यालय का अंतिम निरीक्षण कब किया था?
यदि निरीक्षण नियमित रूप से हुआ है तो क्या निरीक्षण के दौरान शौचालय की साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था और शिक्षक व्यवस्था की वास्तविक स्थिति दर्ज की गई थी? यदि कमियां मिली थीं तो उन्हें दूर करने के लिए क्या निर्देश दिए गए?
और यदि निरीक्षण में सब कुछ ठीक दर्ज किया गया था, तो फिर मौके पर दिखाई दे रही शौचालय की स्थिति उस निरीक्षण रिपोर्ट से कैसे मेल खाती है?
सिर्फ निरीक्षण होना पर्याप्त नहीं है। सवाल यह है कि निरीक्षण के बाद व्यवस्था में कितना सुधार हुआ और क्या उस सुधार की दोबारा पुष्टि की गई?
शिक्षा विभाग और प्राचार्य से सीधे सवाल
1. स्वच्छता: 154 छात्राओं वाले विद्यालय में शौचालय की नियमित सफाई और पर्याप्त पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
2. प्राचार्य: शौचालय और पेयजल की स्थिति की नियमित निगरानी प्राचार्य द्वारा कब-कब की गई? क्या समस्या को लेकर कोई लिखित शिकायत, मांग या पत्राचार उच्च अधिकारियों से किया गया है?
3. शिक्षक: 261 विद्यार्थियों और 9वीं से 12वीं तक की कक्षाओं के लिए 7 शिक्षक, जिनमें 2 अतिथि शिक्षक हैं—क्या स्वीकृत पदों और विषयवार आवश्यकता के हिसाब से यह व्यवस्था पर्याप्त है? बोर्ड कक्षाओं के लिए पर्याप्त विषय शिक्षक उपलब्ध हैं या नहीं?
4. निरीक्षण: BEO द्वारा विद्यालय का अंतिम निरीक्षण कब किया गया और निरीक्षण रिपोर्ट में शौचालय, पेयजल तथा शिक्षक व्यवस्था को लेकर क्या उल्लेख किया गया?
5. कार्रवाई: यदि निरीक्षण में कमियां सामने आई थीं, तो उन्हें दूर करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई और वर्तमान स्थिति क्या है?
विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए साफ शौचालय, पर्याप्त पानी और पर्याप्त शिक्षक कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बुनियादी आवश्यकता हैं।
अब सवाल सिर्फ बुंदेली स्कूल की तस्वीर का नहीं है। सवाल यह है कि जब BEO कार्यालय की स्वच्छता व्यवस्था पर पहले ही सवाल उठ चुके हैं, तो क्या शिक्षा विभाग अपने ही विद्यालयों की जमीनी व्यवस्था की नियमित और प्रभावी निगरानी कर रहा है?
और यदि निरीक्षण नियमित हो रहे हैं, तो क्या निरीक्षण रिपोर्ट और मौके की वास्तविक तस्वीर एक-दूसरे से मेल खाती हैं?
शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह विद्यालय की वास्तविक स्थिति का मौके पर निरीक्षण कर स्वच्छता, पेयजल और शिक्षक व्यवस्था पर स्थिति स्पष्ट करे तथा आवश्यक सुधार सुनिश्चित करे।
सत्यवाहक न्यूज



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