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| शासकीय भवन वर्षों बाद भी अधूरा |
छह साल से निर्माणाधीन शासकीय हाई स्कूल की जमीनी तस्वीर चिंताजनक; दो बार कलेक्टर तक पहुंची शिकायत, अब देरी, भुगतान और जवाबदेही पर सवाल
बेलडीह/पिथौरा | विशेष खोजी रिपोर्ट
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वीकृत शासकीय भवन वर्षों बाद भी अधूरा रह जाए, तो सवाल केवल निर्माण की गति पर नहीं, बल्कि योजना, कार्यप्रगति, भुगतान, गुणवत्ता और जवाबदेही पर भी उठते हैं। बेलडीह का शासकीय हाई स्कूल भवन इसी तरह के सवालों के बीच खड़ा है।
उपलब्ध शासकीय दस्तावेजों के अनुसार, बेलडीह में शासकीय हाई स्कूल भवन निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने 28 सितंबर 2018 को ₹75.23 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की थी। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग से संबंधित था।
लेकिन वर्षों बाद भी भवन का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है। वर्ष 2026 में भी भवन अधूरा है और विद्यालय के लिए इसका उपयोग किस स्तर तक संभव है, यह अपने आप में जांच का विषय बन गया है।
2025 में ₹81.42 लाख का पुनरीक्षित प्राक्कलन
मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय का 9 जून 2025 का पत्र है।
पत्र के अनुसार, मूल प्रशासकीय स्वीकृति ₹75.23 लाख थी। PWD ने बताया कि कार्य की निविदा दर SOR से 30 प्रतिशत अधिक प्राप्त होने के कारण लागत में ₹6.19 लाख की वृद्धि हो रही थी।
इसके बाद ₹81.42 लाख का पुनरीक्षित प्राक्कलन तैयार कर पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को भेजा गया।
यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध पत्र में ₹81.42 लाख को पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति के लिए प्रस्तुत राशि बताया गया है। इस दस्तावेज के आधार पर इसे अंतिम स्वीकृत राशि कहना उचित नहीं होगा।
लेकिन सवाल वहीं है—निर्माण पूरा क्यों नहीं हुआ?
जब वर्ष 2025 में निर्माण कार्य के लिए पुनरीक्षित प्राक्कलन शासन के समक्ष भेजा जा रहा था, तब वर्ष 2026 तक भवन का अधूरा रहना कई सवाल खड़े करता है।
- निर्माण कार्य कब शुरू हुआ और निर्धारित पूर्णता अवधि क्या थी?
- अब तक भवन का कितना कार्य पूर्ण हुआ?
- कार्य में देरी के वास्तविक कारण क्या हैं?
- अब तक ठेकेदार/निर्माण एजेंसी को कितनी राशि का भुगतान हुआ?
- ₹81.42 लाख के पुनरीक्षित प्राक्कलन को अंतिम प्रशासकीय स्वीकृति मिली या नहीं?
- वर्तमान में भवन की तकनीकी स्थिति क्या है?
- शेष कार्य कब तक पूरा होगा और इसकी जिम्मेदारी किसकी तय की गई है?
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| जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत |
18 अगस्त को कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचा मामला
भवन की स्थिति को लेकर 18 अगस्त 2026 को कलेक्टर महासमुंद के जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत की गई। उपलब्ध टोकन के अनुसार जनदर्शन क्रमांक 27/22120226001944 दर्ज है।
शिकायत में निर्माण में हुई देरी के कारणों की जांच के साथ-साथ स्वीकृत राशि में अब तक किए गए व्यय एवं भुगतान, निर्माण गुणवत्ता तथा वर्तमान भौतिक प्रगति की जांच कराने की मांग की गई थी।
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| फिर आवेदन प्रस्तुत |
6 अक्टूबर को फिर कलेक्टर के समक्ष आवेदन
इसके बाद 6 अक्टूबर 2026 को पुनः कलेक्टर महासमुंद को आवेदन दिया गया। इसमें भवन निर्माण शीघ्र पूर्ण कराने के साथ देरी के कारणों की जांच, तकनीकी परीक्षण और लापरवाही पाए जाने की स्थिति में नियमानुसार जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
दो अलग-अलग तिथियों में प्रशासन के समक्ष मामला पहुंचना इस सवाल को महत्वपूर्ण बनाता है कि 18 अगस्त की शिकायत के बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई और वर्तमान में निर्माण कार्य की स्थिति क्या है?
जमीनी तस्वीर: बिना छत का ढांचा, झाड़ियों से घिरा भवन
दस्तावेजों के साथ उपलब्ध जमीनी तस्वीरें भी भवन की वर्तमान स्थिति को सामने रखती हैं। निर्माणाधीन भवन के कई हिस्सों में छत का कार्य पूर्ण नहीं दिखाई देता। पिलर और बीम से लोहे की सरिया बाहर निकली हुई दिखाई दे रही है।
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| झाड़ी उग रहा है |
भवन के कमरों और आसपास झाड़ियां एवं खरपतवार उग आए हैं। लंबे समय से निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण संरचना खुले वातावरण के संपर्क में है।
हालांकि भवन की संरचनात्मक मजबूती अथवा निर्माण गुणवत्ता पर अंतिम निष्कर्ष तकनीकी परीक्षण के बिना नहीं निकाला जा सकता, लेकिन मौजूदा दृश्य स्थिति निश्चित रूप से तकनीकी निरीक्षण की जरूरत को सामने रखती है।
₹75.23 लाख से ₹81.42 लाख तक… अब जवाबदेही जरूरी
बेलडीह हाई स्कूल भवन का मामला अब केवल एक अधूरे सरकारी भवन का मामला नहीं रह गया है। उपलब्ध दस्तावेजों में वर्ष 2018 की ₹75.23 लाख की मूल प्रशासकीय स्वीकृति, वर्ष 2025 में ₹81.42 लाख के पुनरीक्षित प्राक्कलन की प्रक्रिया और वर्ष 2026 में भवन के अधूरे रहने की स्थिति सामने आती है।
ऐसे में जनहित में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि सरकारी राशि का अब तक कितना उपयोग हुआ, कार्य की वास्तविक भौतिक प्रगति कितनी है, पुनरीक्षित राशि की स्थिति क्या है और निर्माण में हुई देरी के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर निर्धारित की गई है।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार पर अनियमितता अथवा भ्रष्टाचार का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन वर्षों से अधूरे पड़े इस विद्यालय भवन को लेकर उठे सवालों का जवाब संबंधित विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड और तकनीकी जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।
सत्यवाहक न्यूज़ इस मामले में मूल प्रशासकीय स्वीकृति, पुनरीक्षित स्वीकृति, कार्यादेश, भुगतान विवरण, कार्य की समय-सीमा और तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट जैसे दस्तावेजों के आधार पर आगे भी तथ्यपरक पड़ताल जारी रखेगा।





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