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18 सितंबर की तालाबंदी
09 स्वीकृत पद, स्कूल में महज एक शिक्षक! 7 दिन का अल्टीमेटम भी बेअसर, 18 सितंबर की तालाबंदी के बाद अब 30 सितंबर को सड़क पर उतरने की तैयारी
पिथौरा। विकासखंड पिथौरा के ग्राम पंचायत डोड़रकसा स्थित शासकीय हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी का मामला अब गंभीर आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। 09 स्वीकृत शिक्षक पदों के विरुद्ध विद्यालय में महज एक शिक्षक के कार्यरत होने का दावा करते हुए ग्रामीणों, पालकों और विद्यार्थियों ने पहले स्कूल में तालाबंदी की और अब 30 सितंबर को NH-53 पर चक्का जाम की चेतावनी दी है।
सवाल अब सिर्फ शिक्षकों की कमी का नहीं है—आखिर एक हाई स्कूल को एक शिक्षक के भरोसे चलाने की नौबत क्यों आई? वर्षों से समस्या सामने होने के बावजूद शिक्षा विभाग ने समय रहते व्यवस्था क्यों नहीं की?
पहले 7 दिन का अल्टीमेटम… फिर स्कूल में पड़ा ताला
ग्रामीणों के अनुसार, 10 सितंबर को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पिथौरा के माध्यम से कलेक्टर महासमुंद को ज्ञापन सौंपकर सात दिनों के भीतर विद्यालय में स्वीकृत पदों के अनुरूप शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की गई थी।
अल्टीमेटम की अवधि समाप्त होने के बाद भी व्यवस्था नहीं होने पर 18 सितंबर को ग्रामीणों और पालकों द्वारा विद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी की गई।
लेकिन तालाबंदी के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने का आरोप है।
अब ग्रामीणों ने अगला कदम और बड़ा उठाने की चेतावनी दी है।
अब NH-53 पर चक्का जाम की चेतावनी
ग्रामीणों ने एसडीएम पिथौरा, जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद और थाना प्रभारी सांकरा को ज्ञापन सौंपकर 30 सितंबर को राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर देवरी के पास चक्का जाम करने की चेतावनी दी है।
यानी मामला अब स्कूल के गेट पर लगे ताले से निकलकर राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचने की स्थिति में है।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार ज्ञापन, चेतावनी और तालाबंदी के बावजूद यदि शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होती है तो आंदोलन करना उनकी मजबूरी होगी।
09 पद स्वीकृत, फिर एक शिक्षक के भरोसे स्कूल क्यों?
ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय में 09 शिक्षक पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल एक शिक्षक के कार्यरत होने की स्थिति है।
यदि यह स्थिति सही है तो सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या एक शिक्षक हाई स्कूल के सभी विषयों और कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावी ढंग से संचालित कर सकता है?
और अगर नहीं, तो फिर इतने लंबे समय से वैकल्पिक शिक्षक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
2021 से चली आ रही कमी, फिर भी समाधान क्यों नहीं?
ग्रामीणों द्वारा दिए गए विवरण के अनुसार, वर्ष 2021 में विद्यालय में तीन शिक्षक पदस्थ थे। इनमें से एक शिक्षक को स्वामी आत्मानंद स्कूल बसना में अटैच किया गया, जबकि दूसरे शिक्षक के वर्ष 2023 से अवैतनिक अवकाश पर होने की जानकारी दी गई है।
इसके बाद विद्यालय में शिक्षकों की संख्या लगातार घटती गई और वर्तमान में केवल एक शिक्षक के भरोसे स्कूल संचालित होने का दावा किया जा रहा है।
यदि विभाग को वर्षों से शिक्षकों की कमी की जानकारी थी, तो—
स्थायी शिक्षक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
अटैचमेंट के बाद मूल विद्यालय में शिक्षक की कमी की भरपाई क्यों नहीं की गई?
अवकाश पर गए शिक्षक के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं हुई?
युक्तियुक्तकरण हुआ, फिर डोड़रकसा क्यों छूटा?
ग्रामीणों का एक और गंभीर सवाल हालिया युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर है।
उनका कहना है कि विद्यालय में पहले से शिक्षकों की भारी कमी थी, इसके बावजूद युक्तियुक्तकरण के बाद भी स्कूल को पर्याप्त शिक्षक नहीं मिल पाए।
ऐसे में सवाल उठता है—
जब विद्यालय की जरूरत स्पष्ट थी, तो युक्तियुक्तकरण में इसकी स्थिति का समाधान क्यों नहीं हुआ?
क्या विभाग के रिकॉर्ड में विद्यालय की वास्तविक स्थिति दर्ज नहीं थी?
या फिर स्थिति की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई?
बच्चों की पढ़ाई पर असर, जिम्मेदारी किसकी?
शिक्षकों की कमी का सबसे सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का आरोप है कि गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
यहां सवाल सिर्फ पदों की संख्या का नहीं, बल्कि बच्चों को नियमित और विषयवार शिक्षा मिलने का है।
अगर स्वीकृत 09 पदों के मुकाबले एक शिक्षक ही उपलब्ध है, तो विद्यार्थियों की विषयवार पढ़ाई आखिर कैसे हो रही है?
अब विभाग से जवाब मांग रहे ग्रामीण
डोड़रकसा के मामले में अब कई सवाल सीधे शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे हैं—
◆ 09 शिक्षक पद स्वीकृत होने के बावजूद स्कूल एक शिक्षक के भरोसे क्यों?
◆ वर्ष 2021 से समस्या बनी है तो अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं?
◆ एक शिक्षक को दूसरे विद्यालय में अटैच करने के बाद मूल विद्यालय की भरपाई क्यों नहीं की गई?
◆ अवकाश पर गए शिक्षक के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं हुई?
◆ युक्तियुक्तकरण के बाद भी डोड़रकसा को पर्याप्त शिक्षक क्यों नहीं मिले?
◆ क्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विद्यालय पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया?
◆ क्या विभाग के पास विद्यार्थियों की विषयवार पढ़ाई प्रभावित होने की रिपोर्ट है?
ताले से सड़क तक पहुंचा मामला, अब प्रशासन की परीक्षा
18 सितंबर को स्कूल में तालाबंदी और अब 30 सितंबर को NH-53 पर चक्का जाम की चेतावनी—ये दोनों घटनाएं बताती हैं कि ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या 30 सितंबर से पहले शिक्षा विभाग डोड़रकसा हाई स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था करेगा, या फिर बच्चों की शिक्षा से जुड़ा यह मामला सड़क पर आंदोलन का रूप लेगा?
फिलहाल गेंद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के पाले में है।
पिथौरा सत्यवाहक न्यूज



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