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| स्कूल में ताला बंद |
7 दिन का अल्टीमेटम खत्म, व्यवस्था जस की तस; ग्रामीणों का सवाल—बच्चों की पढ़ाई ठप होने के बाद भी शिक्षा विभाग कब जागेगा?
पिथौरा। विकासखंड पिथौरा के ग्राम पंचायत डोड़रकसा स्थित शासकीय हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों, पालकों और छात्र-छात्राओं का आक्रोश अब आंदोलन में बदल गया है। कलेक्टर महासमुंद को दिए गए 7 दिन के अल्टीमेटम की अवधि पूरी होने के बावजूद शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने पर ग्रामीणों ने 18 सितंबर से विद्यालय में अनिश्चितकालीन तालाबंदी का ऐलान किया है।
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| ग्रामीणों के द्वारा स्कूल में ताला बंद |
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल स्वीकृत 09 शिक्षक पदों के विरुद्ध महज एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा है। ऐसे में हाई स्कूल स्तर के विद्यार्थियों की पढ़ाई किस तरह संचालित हो रही है, यह अपने आप में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
तीन साल से समस्या, फिर भी स्थायी समाधान क्यों नहीं?
ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन के अनुसार वर्ष 2021 में विद्यालय में तीन शिक्षक पदस्थ थे। इनमें से एक शिक्षक को स्वामी आत्मानंद स्कूल बसना में अटैच किया गया, जबकि दूसरे शिक्षक वर्ष 2023 से अवैतनिक अवकाश पर बताए जा रहे हैं। वर्तमान में विद्यालय में केवल एक शिक्षक कार्यरत है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिक्षकों की कमी लंबे समय से बनी हुई थी, तो शिक्षा विभाग ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की?
युक्तियुक्तकरण में भी नहीं मिला शिक्षक, आखिर जिम्मेदार कौन?
ग्रामीणों के अनुसार हालिया युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में भी डोड़रकसा हाई स्कूल को शिक्षक नहीं मिल पाया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब विद्यालय में शिक्षकों की वास्तविक कमी पहले से दर्ज थी, तो युक्तियुक्तकरण के दौरान इस स्कूल की जरूरत को प्राथमिकता क्यों नहीं मिली?
क्या विभाग के पास विद्यालय की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं थी, या जानकारी होने के बावजूद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया?
7 दिन का अल्टीमेटम भी बेअसर—अब तालाबंदी
10 सितंबर को ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी पिथौरा के माध्यम से कलेक्टर महासमुंद को ज्ञापन सौंपकर 7 दिवस के भीतर स्वीकृत पदों के अनुरूप शिक्षकों की पदस्थापना की मांग की थी। समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता चुना है।
अब सवाल सिर्फ शिक्षकों की संख्या का नहीं, बल्कि बच्चों के नियमित और गुणवत्तापूर्ण अध्यापन के अधिकार का है।
विभाग से सीधे सवाल
09 पद स्वीकृत होने के बावजूद स्कूल एक शिक्षक के भरोसे क्यों?
वर्षों से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ?
अटैच किए गए शिक्षक को मूल विद्यालय में वापस लाने या वैकल्पिक शिक्षक देने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अवकाश पर गए शिक्षक के स्थान पर अब तक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
युक्तियुक्तकरण में स्कूल की जरूरत को नजरअंदाज क्यों किया गया?
क्या विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर विद्यालय की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया है?
बच्चों का भविष्य दांव पर, विभाग की जवाबदेही तय होना जरूरी
विद्यालय में शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक शिक्षकों की उचित व्यवस्था नहीं होती, तालाबंदी और आंदोलन जारी रहेगा।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ग्रामीणों की मांग पर क्या कदम उठाते हैं। सवाल साफ है—जब स्कूल में 09 शिक्षक पद स्वीकृत हैं, तो बच्चों को एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाने की नौबत आखिर क्यों आई?



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