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धान के खेतों के बीच चल रहा ‘शंकरा ग्लोबल स्कूल’! 44 बच्चों की पढ़ाई पर सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल

 

ये दृश्य हैं स्कूल का


न स्कूल का बोर्ड, न स्पष्ट सूचना पटल; पेयजल, खेल मैदान और मान्यता के मापदंडों को लेकर उठे सवाल—BEO ने कहा, लिखित शिकायत मिलने पर होगी जांच

पिथौरा/भगत देवरी।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पिथौरा विकासखंड के ग्राम सावित्रीपुर के आश्रित ग्राम तिलंजनपुर में संचालित ‘शंकरा ग्लोबल स्कूल’ को लेकर मौके की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। धान के खेतों के बीच एक फार्म हाउस परिसर में संचालित बताए जा रहे इस विद्यालय में करीब 44 बच्चे अध्ययनरत हैं।

मौके पर विद्यालय की पहचान, मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा मानकों को लेकर जो सवाल सामने आ रहे हैं, उनका स्पष्ट जवाब संबंधित शिक्षा विभाग से अपेक्षित है।

कोई नाम हैं दिख रहा


स्कूल की पहचान तक स्पष्ट नहीं, आखिर क्यों?

मौके पर विद्यालय भवन पर स्कूल का नाम, प्रमुख सूचना पटल अथवा मान्यता से संबंधित विवरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल है कि किस आधार पर विद्यालय का संचालन हो रहा है और अभिभावकों को विद्यालय की मान्यता एवं पंजीयन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक रूप से क्यों उपलब्ध नहीं है?

विद्यालय का UDISE कोड, मान्यता आदेश और मान्यता की शर्तें मौके पर अथवा विभागीय रिकॉर्ड में क्या हैं—यह भी जांच का विषय है।

धान के खेतों के बीच कक्षाएं, कीटनाशक छिड़काव से सुरक्षा पर सवाल

विद्यालय चारों ओर कृषि भूमि से घिरा हुआ बताया जा रहा है। आसपास धान की फसल में कीटनाशक एवं कृषि रसायनों का उपयोग होता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या विद्यालय परिसर के आसपास कीटनाशक छिड़काव से बच्चों को बचाने के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था या निर्धारित प्रोटोकॉल है? यदि है, तो उसकी जानकारी अभिभावकों को दी गई है या नहीं—इसकी भी जांच जरूरी है।

सिंचाई के बोर से बच्चों के लिए पेयजल?

विद्यालय में बच्चों के लिए सुरक्षित पेयजल व्यवस्था को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि खेत में सिंचाई के लिए उपयोग होने वाले बोर से पाइप के माध्यम से विद्यालय में पानी पहुंचाया जा रहा है।

यदि ऐसा है तो सबसे अहम सवाल यह है कि क्या इस पानी की नियमित गुणवत्ता जांच कराई जाती है? क्या बच्चों को उपलब्ध पानी पीने योग्य घोषित किया गया है? इन सवालों का जवाब जांच और पानी के नमूने की रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकता है।

कागजों में खेल मैदान, मौके पर कृषि भूमि?

विद्यालय के खेल मैदान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ग्रामीणों का दावा है कि जिस भूमि को खेल मैदान के रूप में बताया जाता है, वहां मौके पर कृषि गतिविधि दिखाई देती है।

यदि विद्यालय की मान्यता में खेल मैदान का प्रावधान दर्शाया गया है, तो मान्यता के समय प्रस्तुत दस्तावेज और वर्तमान मौके की स्थिति का मिलान कौन करेगा? यही जांच इस पूरे मामले की वास्तविकता सामने ला सकती है।

मान्यता की फाइल बनेगी जांच का सबसे बड़ा आधार

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल विद्यालय के संचालन और मान्यता प्रक्रिया को लेकर है। विद्यालय ने किन दस्तावेजों के आधार पर मान्यता प्राप्त की? निरीक्षण कब हुआ? निरीक्षण रिपोर्ट में क्या दर्ज है? भवन, अग्नि सुरक्षा, पेयजल, शौचालय, खेल मैदान और अन्य निर्धारित सुविधाओं के संबंध में क्या प्रमाण प्रस्तुत किए गए?

इन सवालों का जवाब किसी आरोप या दावे से नहीं, बल्कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मौजूद मान्यता फाइल से मिल सकता है।

सवाल पूछने पर बदसलूकी के आरोप, जांच से सामने आएगी सच्चाई

ग्रामीणों एवं कुछ जागरूक नागरिकों ने विद्यालय प्रबंधन पर सवाल पूछने पर कथित रूप से बदसलूकी और धमकाने के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि ऐसी कोई घटना हुई है तो संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसकी जांच होनी चाहिए।

BEO ने कहा—लिखित शिकायत मिलने पर होगी जांच

इस संबंध में विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती लक्ष्मी डडसेना ने बताया कि विद्यालय की मान्यता से संबंधित जानकारी एवं निर्धारित मापदंडों से जुड़ी फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से ही प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि विद्यालय के संबंध में लिखित शिकायत प्राप्त होने पर जांच की कार्रवाई की जाएगी।

अब विभाग से सीधे सवाल

  • विद्यालय को मान्यता किस आदेश एवं किन दस्तावेजों के आधार पर मिली?
  • मान्यता से पहले विद्यालय का भौतिक निरीक्षण कब और किस अधिकारी ने किया?
  • मान्यता फाइल में भवन, पेयजल, शौचालय, अग्नि सुरक्षा और खेल मैदान के संबंध में क्या रिपोर्ट दर्ज है?
  • विद्यालय का UDISE कोड और वर्तमान मान्यता की वैधता क्या है?
  • बच्चों को उपलब्ध पेयजल की गुणवत्ता की आखिरी जांच कब हुई?
  • कृषि भूमि से घिरे विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा को लेकर विभाग ने क्या निरीक्षण किया?
  • मान्यता के दस्तावेजों में दर्शाई गई भूमि और मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कब किया गया?

अब निगाहें शिक्षा विभाग की जांच पर हैं। यदि विद्यालय सभी निर्धारित मानकों को पूरा करता है तो दस्तावेजों और निरीक्षण रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन मिला है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है—इन 44 बच्चों की शिक्षा के साथ उनकी सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

सत्यवाहक न्यूज

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