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चक्काजाम, आंदोलन और DEO का आदेश भी बेअसर? डोड़रकसा स्कूल में शिक्षक नहीं पहुँचे, बच्चों की पढ़ाई पर अब भी संकट!

 

AI द्वारा बनाए चित्र


NH-53 पर चक्काजाम कर ग्रामीणों ने उठाई थी शिक्षकों की मांग, 30 सितंबर को DEO ने तत्काल अध्यापन का दिया निर्देश; 1 अक्टूबर को संबंधित शिक्षक की अनुपस्थिति ने खड़े किए सवाल

पिथौरा। बच्चों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों को सड़क पर उतरकर चक्काजाम करना पड़े, आंदोलन करना पड़े और प्रशासन से गुहार लगानी पड़े, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम डोड़रकसा के शासकीय हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी का मामला अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। ग्रामीणों के आंदोलन और NH-53 पर चक्काजाम की स्थिति बनने के बाद भी यदि बच्चों को नियमित पढ़ाई के लिए शिक्षकों का इंतजार करना पड़ रहा है, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

सड़क पर उतरे ग्रामीण, फिर भी समाधान का इंतजार!

डोड़रकसा शासकीय हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों, पालकों और विद्यार्थियों ने लगातार अपनी मांग उठाई। स्कूल में शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को अल्टीमेटम भी दिया गया। आंदोलन के दौरान NH-53 पर चक्काजाम की स्थिति ने मामले की गंभीरता को सामने ला दिया था। ग्रामीणों की मांग स्पष्ट थी—बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

बताया गया कि विद्यालय में स्वीकृत नौ शिक्षक पदों के मुकाबले केवल एक शिक्षक की उपस्थिति में पढ़ाई संचालित होने की स्थिति बनी हुई थी। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

DEO का तत्काल अध्यापन का आदेश, लेकिन अगले दिन शिक्षक नदारद!

मामले में 30 सितंबर 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी, महासमुंद की ओर से जारी पत्र में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पिथौरा में कार्यरत संबंधित शिक्षक को शासकीय हाई स्कूल डोड़रकसा में उपस्थित होकर तत्काल अध्यापन कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इस आदेश से उम्मीद जगी कि अब विद्यार्थियों की पढ़ाई नियमित हो सकेगी। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, 1 अक्टूबर को भी संबंधित शिक्षक डोड़रकसा स्कूल नहीं पहुँचे। यदि इसकी पुष्टि विद्यालय के उपस्थिति अभिलेखों से होती है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि तत्काल अध्यापन के निर्देश के बाद भी पढ़ाई शुरू कराने की प्रक्रिया कहाँ अटकी हुई है।

अब सवाल शिक्षा विभाग से—बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी किसकी?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामीणों को अपनी मांग मनवाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ा, तब भी समस्या के समाधान में देरी क्यों हो रही है? जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश के बाद संबंधित शिक्षक ने कार्यभार ग्रहण किया या नहीं? यदि नहीं, तो इसके पीछे क्या कारण है? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—डोड़रकसा के विद्यार्थियों की पढ़ाई नियमित कराने के लिए विभाग ने आगे क्या कदम उठाए हैं?

आदेश जारी करना प्रशासनिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है, लेकिन उसका जमीन पर क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है। विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान न हो, इसके लिए विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

व्यवस्था से सीधे सवाल

  • ग्रामीणों के आंदोलन और चक्काजाम के बाद भी शिक्षकों की व्यवस्था में देरी क्यों हुई?
  • 30 सितंबर के तत्काल अध्यापन संबंधी आदेश के बाद संबंधित शिक्षक ने कब कार्यभार ग्रहण किया?
  • 1 अक्टूबर को शिक्षक की अनुपस्थिति की स्थिति में विभाग ने क्या कार्रवाई की?
  • विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए अब ठोस कदम कब उठाए जाएंगे?

अब देखना यह है कि डोड़रकसा के बच्चों को नियमित पढ़ाई के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा, या फिर शिक्षा विभाग के आदेश का पालन सुनिश्चित कराकर व्यवस्था वास्तव में जमीन पर उतारी जाएगी।

सत्यवाहक न्यूज

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