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शिक्षा के अधिकार को लेकर NH-53 पर चक्काजाम: डोड़रकसा के शिक्षक संकट ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल?

 

NH 53 प्रदर्शन करते ग्रामीण


6 पद स्वीकृत, लंबे समय तक सिर्फ 2 शिक्षक; कई ज्ञापनों और 7 दिन के अल्टीमेटम के बाद भी नहीं बनी बात, सड़क पर उतरे पालक-ग्रामीण तो पहुंचा प्रशासन

पिथौरा। विकासखंड पिथौरा के ग्राम डोड़रकसा स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में लंबे समय से चली आ रही शिक्षकों की कमी अब सड़क तक पहुंच गई। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों, पालकों और विद्यार्थियों की नाराजगी आखिरकार NH-53 पर चक्काजाम के रूप में सामने आई।

बताया गया कि स्कूल में 6 शिक्षक पद स्वीकृत हैं, लेकिन लंबे समय तक महज 2 शिक्षक ही पदस्थ रहे। करीब 33 विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायत को लेकर ग्रामीणों और पालक समिति द्वारा लगातार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जाते रहे। कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीएम पिथौरा के समक्ष समस्या रखे जाने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं होने पर 10 सितंबर को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया गया।

अल्टीमेटम की अवधि पूरी होने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया तो 18 सितंबर से स्कूल में तालाबंदी कर आंदोलन शुरू किया गया। करीब 11 दिनों तक चले आंदोलन के बाद भी समाधान नहीं निकलने पर बुधवार को ग्रामीण, पालक और विद्यार्थी NH-53 पर उतर गए।


ब्लॉक शिक्षा अधिकारी हाय हाय के नारे लगाती छात्राएं


जिला शिक्षा अधिकारी हाय हाय के नारे लगाते ग्रामीण

नारों से गूंजा NH-53, शिक्षा विभाग के खिलाफ दिखा आक्रोश

चक्काजाम के दौरान मौके पर मौजूद विद्यार्थियों, पालकों और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की ओर से “जिला शिक्षा विभाग हाय हाय”, “शासन-प्रशासन हाय हाय” और “ब्लॉक शिक्षा अधिकारी हाय हाय” जैसे नारे लगाए गए।

लंबे समय से शिक्षकों की कमी और लगातार मांग के बावजूद समाधान नहीं होने को लेकर प्रदर्शनकारियों में आक्रोश देखने को मिला। आंदोलनकारियों का कहना था कि जब स्कूल में शिक्षकों की कमी की जानकारी पहले से अधिकारियों के संज्ञान में थी, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से पहले ही व्यवस्था क्यों नहीं की गई? उनका सवाल था कि आखिर बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्हें तालाबंदी और फिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम करने की स्थिति तक क्यों पहुंचना पड़ा।



करीब 1 घंटे 20 मिनट तक थमा हाईवे, दोनों ओर लगी वाहनों की कतार

बुधवार को डोड़रकसा क्षेत्र के ग्रामीणों ने भगतदेवरी के पास NH-53 पर चक्काजाम कर दिया। देखते ही देखते हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। करीब 1 घंटे 20 मिनट तक यातायात प्रभावित रहा।

स्थिति को देखते हुए पिथौरा पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा। अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बातचीत हुई। मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन, एसडीएम बजरंग सिंह वर्मा और एसडीओपी अजीत ओगरे पहुंचे।

आदेश कॉपी


चक्काजाम के बाद बनी वैकल्पिक व्यवस्था

ग्रामीणों की मांगों और स्कूल की स्थिति पर चर्चा के बाद शिक्षा विभाग की ओर से तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई। जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों की कमी थी और अब दो शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, जिसमें गणित के व्याख्याता भी शामिल हैं।

इस व्यवस्था के बाद स्कूल में उपलब्ध शिक्षकों की संख्या चार हो गई है। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त किया और NH-53 पर यातायात सामान्य हुआ।

सवाल सिर्फ शिक्षकों की कमी का नहीं, व्यवस्था की कार्यप्रणाली का भी है

डोड़रकसा का पूरा घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है। जब स्कूल में शिक्षकों की कमी की जानकारी लंबे समय से विभाग के संज्ञान में थी, ग्रामीणों द्वारा बार-बार ज्ञापन दिए जा रहे थे और 7 दिन का अल्टीमेटम भी दिया गया था, तो समय रहते समाधान क्यों नहीं हो सका?

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या किसी शासकीय स्कूल की समस्या का समाधान कराने के लिए पहले तालाबंदी और फिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम की स्थिति बनना जरूरी है?

यदि चक्काजाम के बाद तत्काल दो शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है, तो यही व्यवस्था आंदोलन शुरू होने से पहले क्यों नहीं की गई? क्या विभाग की शिकायत-निवारण व्यवस्था केवल आंदोलन और दबाव के बाद ही सक्रिय होती है?

विभाग से 5 सीधे सवाल

1. जब स्कूल में शिक्षकों की कमी की जानकारी पहले से थी, तो समय रहते विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

2. ग्रामीणों और पालक समिति द्वारा लगातार ज्ञापन देने तथा 7 दिन का अल्टीमेटम देने के बावजूद समाधान में देरी क्यों हुई?

3. करीब 11 दिनों की तालाबंदी और आंदोलन के बाद ही NH-53 पर चक्काजाम की नौबत क्यों आई?

4. जब 6 शिक्षक पद स्वीकृत थे और लंबे समय तक केवल 2 शिक्षक पदस्थ रहे, तब विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए विभाग ने क्या वैकल्पिक व्यवस्था की थी?

5. अब की गई दो शिक्षकों की व्यवस्था स्थायी समाधान है या अस्थायी? स्कूल में स्वीकृत पदों के अनुरूप विषयवार स्थायी शिक्षक कब तक उपलब्ध होंगे?

अब निगाह विभाग के अगले कदम पर

फिलहाल चक्काजाम समाप्त हो गया है और विभाग ने वैकल्पिक शिक्षकों की व्यवस्था की है। लेकिन ग्रामीणों की मूल मांग केवल तत्काल राहत नहीं, बल्कि स्कूल में स्वीकृत पदों के अनुरूप पर्याप्त और विषयवार शिक्षकों की स्थायी व्यवस्था है।

डोड़रकसा का घटनाक्रम अब सिर्फ एक स्कूल की समस्या तक सीमित नहीं रह गया है। यह सवाल भी सामने है कि क्या सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का समाधान प्रशासनिक स्तर पर समय रहते होगा, या फिर हर बार समस्या के सड़क पर पहुंचने का इंतजार किया जाएगा?

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