संकट की घड़ी में अग्रवाल समाज ने दिखाई सेवा, संवेदना और तत्परता की मिसाल
पिथौरा। संकट की घड़ी में सामाजिक एकजुटता और सेवा भावना का एक प्रेरणादायक उदाहरण पिथौरा में देखने को मिला। लापता भागीरथी की तलाश में जुटे SDRF और NDRF के करीब 60 सदस्यीय दल के लिए देर रात तत्काल ठहरने एवं आवश्यक व्यवस्थाओं की जरूरत सामने आई। सूचना मिलते ही अग्रवाल समाज ने बिना किसी औपचारिकता के महज 15 मिनट में व्यवस्था खड़ी कर दी।
जानकारी के अनुसार, रात करीब 10 बजे अग्रवाल समाज के एक सदस्य के मोबाइल पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का फोन आया। अधिकारी की ओर से बताया गया कि 30 अगस्त को पुराने जोंक पुल, संकरा क्षेत्र में हुई घटना के बाद लापता भागीरथी की तलाश के लिए अभियान जारी है। अभियान में SDRF और NDRF की टीम जुटी हुई है और करीब 60 जवानों के ठहरने तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की तत्काल आवश्यकता है।
फोन की सूचना मिलते ही अग्रवाल समाज के अध्यक्ष वेदप्रकाश गोयल के नेतृत्व में समाज के सदस्य सक्रिय हो गए। रात के समय होने के बावजूद सदस्यों ने आपसी समन्वय से जवानों के ठहरने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को जुटाने का काम शुरू कर दिया।
15 मिनट में तैयार हुई व्यवस्था
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात यह रही कि सूचना मिलने के बाद महज 15 मिनट के भीतर करीब 60 जवानों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर दी गईं। इतनी कम समय में व्यवस्था तैयार होना समाज की संगठन क्षमता, तत्परता और सेवा भावना को दर्शाता है।
एक ओर NDRF और SDRF के जवान विषम परिस्थितियों में लापता व्यक्ति की तलाश में अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समाज द्वारा उनके लिए तत्काल व्यवस्था करना मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बना।
जरूरत के समय साथ खड़ा होना ही असली सेवा
अग्रवाल समाज की इस पहल ने यह संदेश दिया कि सेवा के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि जरूरत के समय सही निर्णय और सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण होता है।
रात के समय अचानक सामने आई जरूरत पर समाज के सदस्यों ने जिस तेजी से जिम्मेदारी संभाली, वह स्थानीय स्तर पर सामाजिक संगठनों की भूमिका को भी रेखांकित करती है।
महज 15 मिनट में 60 जवानों के लिए व्यवस्था—यह केवल एक इंतजाम नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में समाज की एकजुटता, संवेदना और सेवा भावना की मिसाल है।
सत्यवाहक न्यूज

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