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₹11.84 लाख स्वीकृत, चार महीने बाद भी निर्माण शुरू नहीं! निजी मकान में 115 बच्चे, बिना छत-दरवाजे का शौचालय

 

2 वर्षो से बंद पड़ा स्कूल


दो साल से भवनविहीन शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय की बदहाल तस्वीर; आखिर किस स्तर पर अटकी निर्माण की प्रक्रिया?

महासमुंद। पटेवा क्षेत्र के ग्राम नवागांव में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय नवागांव पिछले करीब दो वर्षों से अपने भवन के अभाव में निजी मकान में संचालित हो रहा है। विद्यालय में वर्तमान में 115 विद्यार्थी दर्ज हैं, जिनमें 57 बालिकाएं और 58 बालक शामिल हैं।

विद्यालय में कक्षा 6वीं में 45, 7वीं में 36 और 8वीं में 34 विद्यार्थी दर्ज हैं। इतने विद्यार्थियों वाला शासकीय विद्यालय लंबे समय से अपने भवन के बजाय निजी मकान में संचालित हो रहा है। ऐसे में विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं और निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

निजी भवन में स्कूल संचालित


₹11.84 लाख स्वीकृत, चार महीने गुजर गए—काम कहां है?

उपलब्ध आदेश के अनुसार विद्यालय भवन निर्माण के लिए ₹11.84 लाख की राशि स्वीकृत की गई है। ग्रामीणों के अनुसार स्वीकृति जारी हुए करीब चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मौके पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।

यहीं से कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आते हैं—

राशि स्वीकृत होने के बाद निर्माण कार्य अब तक शुरू क्यों नहीं हुआ?

निर्माण एजेंसी या कार्यदायी संस्था कौन है?

कार्यादेश जारी हुआ है या नहीं?

तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया किस चरण में है?

यदि कोई प्रक्रिया लंबित है तो उसकी वजह क्या है?

और सबसे बड़ा सवाल—115 बच्चों को अपने स्कूल भवन के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा?

बिना छत दरवाजे के शौचालय

स्वच्छता विहीन शौचालय


57 बालिकाएं, लेकिन शौचालय की हालत चिंताजनक

विद्यालय की समस्या केवल भवन तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय में उपलब्ध शौचालयों में से एक की स्थिति बेहद खराब है। शौचालय में छत और दरवाजा नहीं है।

विद्यालय में 57 बालिकाएं अध्ययनरत हैं। ऐसे में शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा की यह स्थिति स्वच्छता, निजता और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वातावरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

इस स्थिति की आधिकारिक पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण आवश्यक है।

किस विभाग की जिम्मेदारी, कौन देगा जवाब?

अब निगाहें संबंधित शिक्षा विभाग और भवन निर्माण से जुड़ी कार्यदायी एजेंसी पर हैं। शिक्षा विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विद्यालय भवन की स्वीकृति के बाद निर्माण प्रक्रिया किस स्थिति में है। वहीं संबंधित निर्माण एजेंसी को कार्यादेश, निर्माण शुरू होने की संभावित तारीख और कार्य की समय-सीमा स्पष्ट करनी चाहिए।

स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायत की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। पंचायत की महिला सरपंच ने जल्द भवन निर्माण शुरू कराने की बात कही है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आश्वासन कब वास्तविक निर्माण कार्य में बदलता है।

सिर्फ स्वीकृति काफी नहीं, जमीन पर काम कब?

करीब दो वर्षों से निजी मकान में संचालित विद्यालय, 115 विद्यार्थी, बदहाल शौचालय और ₹11.84 लाख की स्वीकृति के चार महीने बाद भी निर्माण शुरू नहीं होना—ये परिस्थितियां व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।

अब कार्रवाई की जरूरत

ग्रामीणों और अभिभावकों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मामले का तत्काल स्थल निरीक्षण करें, भवन निर्माण की पूरी प्रक्रिया की स्थिति सार्वजनिक करें और यदि किसी स्तर पर अनावश्यक देरी पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।

साथ ही शौचालय की तत्काल मरम्मत/व्यवस्था कर विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं पर्याप्त शौचालय सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

सबसे अहम मांग है कि ₹11.84 लाख से स्वीकृत स्कूल भवन का निर्माण निर्धारित समय-सीमा में शुरू कराया जाए, ताकि नवागांव के 115 विद्यार्थियों को निजी मकान में पढ़ाई करने की मजबूरी से जल्द राहत मिल सके।

अब सवाल सिर्फ भवन का नहीं, बल्कि जवाबदेही का है—स्वीकृति के चार महीने बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ तो इसकी वजह क्या है और जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

सत्यवाहक न्यूज

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