भाजपा कार्यकर्ता से सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष तक का सफर, सामाजिक सरोकारों, जनसेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका

बागबाहरा/महासमुंद। सार्वजनिक जीवन में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल किसी पद या राजनीतिक जिम्मेदारी से नहीं, बल्कि समाज के बीच उनकी सक्रियता और सेवा कार्यों से बनती है। भीखम सिंह ठाकुर (नेताम) का सार्वजनिक जीवन भी इसी सोच और निरंतर सक्रियता की कहानी है। बागबाहरा की गलियों से शुरू हुई उनकी यात्रा आज महासमुंद जिले के सामाजिक एवं राजनीतिक परिदृश्य में एक अलग पहचान बना चुकी है।

भीखम सींग ठाकुर


24 अप्रैल 1981 को जन्मे भीखम सिंह ठाकुर ने बी.कॉम. तक शिक्षा प्राप्त की। पिता स्व. श्री दीवान सिंह ठाकुर और माता श्रीमती देवकी ठाकुर के संस्कारों में पले-बढ़े ठाकुर का जीवन प्रारंभ से ही सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता ठाकुर प्रधान पाठक हैं। उनके पुत्र हर्ष सिंह ठाकुर और रोहन सिंह ठाकुर हैं। उनका स्थायी निवास बागबाहरा, जिला महासमुंद है। व्यवसायिक रूप से वे हर्ष राजा सीजी मोटर्स एवं ऑटो डील, राष्ट्रीय राजमार्ग, बागबाहरा से जुड़े हैं।

1998 में विचारधारा से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा

किसी भी सार्वजनिक जीवन की शुरुआत किसी विचार और उद्देश्य से होती है। भीखम सिंह ठाकुर के राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1998 में हुई। पूर्व प्रधानमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी की विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की।

खल्लारी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं एवं पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने संगठन के विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। समय के साथ कार्यकर्ता से जिम्मेदार पदाधिकारी तक उनका सफर आगे बढ़ता गया।

बागबाहरा नगरपालिका चुनाव के दौरान पार्टी ने उन्हें वार्ड क्रमांक 2 एवं 3 का वार्ड प्रभारी बनाया। संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और सक्रिय जनसंपर्क के माध्यम से दोनों वार्डों के प्रत्याशियों को विजयी बनाने में उन्होंने भूमिका निभाई। इसके बाद विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी पार्टी द्वारा सौंपे गए विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया।

उनकी सक्रियता और संगठन के प्रति निरंतर जुड़ाव को देखते हुए वर्ष 2014 से 2019 तक अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2023 में महासमुंद जिले में तेंदूपत्ता आंदोलन प्रभारी का दायित्व भी उन्होंने संभाला।

10 सितंबर 2021: सर्व आदिवासी समाज की जिम्मेदारी

भीखम सिंह ठाकुर के सामाजिक जीवन में 10 सितंबर 2021 महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। महासमुंद जिले के सर्व आदिवासी समाज के हजारों सामाजिक जनों की उपस्थिति में उन्हें सर्व आदिवासी समाज, महासमुंद का निर्विरोध जिलाध्यक्ष चुना गया।



जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने समाज के हक और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न आंदोलनों और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई। राष्ट्रीय राजमार्ग चक्काजाम, जेल भरो आंदोलन, विशाल धरना-रैली तथा महासमुंद कलेक्टर कार्यालय के घेराव जैसे कार्यक्रमों में समाज को संगठित करने का प्रयास किया गया।

उनकी भूमिका केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक मुद्दों को लेकर लोगों के बीच संवाद और जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।



सेवा को बनाया सामाजिक जिम्मेदारी

महाविद्यालयीन जीवन में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) से जुड़ाव ने उनके भीतर सेवा की भावना को और मजबूत किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने क्षेत्र के बुजुर्गों एवं बीमार लोगों की सेवा में सहभागिता निभाई।

युवाओं और जरूरतमंदों को शासन की चिकित्सा संबंधी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही जरूरतमंद लोगों को रक्त एवं अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग किया। उनके लिए सेवा किसी विशेष अवसर तक सीमित गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा रही है।

             बुढ़ादेव देवालय



बुढ़ादेव देवालय: आस्था, संस्कृति और पर्यावरण का संगम

ग्राम घुँचापाली में मौ चंडी देवी मंदिर के नीचे गोंड समाज की निजी भूमि पर भव्य बुढ़ादेव देवालय का निर्माण उनके सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों का महत्वपूर्ण अध्याय है।

मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने निर्माण कार्य में भूमिका निभाई। देवालय का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कर-कमलों से संपन्न हुआ।

बुढ़ादेव देवालय की पहल केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही। मंदिर के आसपास लगभग 5 एकड़ भूमि पर छायादार, औषधीय एवं फलदार पौधों का रोपण किया गया। इसके अलावा आर्ट ऑफ लिविंग परिवार, ग्रीन केयर सोसायटी और पुलिस थाना बागबाहरा के सहयोग से नगर एवं क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर वृक्षारोपण अभियान में भी सहभागिता रही।

हाईवे के आसपास छायादार वृक्ष लगाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इस तरह आस्था, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने की पहल उनके सामाजिक सोच के एक अलग पक्ष को सामने लाती है।



संगठन से समाज तक जारी है सफर

भीखम सिंह ठाकुर के सार्वजनिक जीवन को देखें तो उनके सफर के कई आयाम दिखाई देते हैं। एक ओर भाजपा संगठन में लंबे समय तक कार्यकर्ता और पदाधिकारी के रूप में जिम्मेदारियां निभाने का अनुभव है, तो दूसरी ओर सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष के रूप में सामाजिक मुद्दों को लेकर सक्रिय भूमिका रही है।

जनसंपर्क, सामाजिक संगठन, सेवा कार्य, धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियां और पर्यावरण संरक्षण—इन सभी क्षेत्रों में उनकी सक्रियता उनके सार्वजनिक जीवन की तस्वीर को व्यापक बनाती है।

एक कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुई यात्रा आज सामाजिक जिम्मेदारी के व्यापक दायरे तक पहुंच चुकी है। उनके लिए दायित्व केवल पद नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम है।

सत्यवाहक न्यूज